RTI ACTIVISTS FORUM M.P.

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सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

 


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे  (https://timesofcrime.com/ ) जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036

वरिष्ठ पत्रकार नीलेश जाट, सौरभ राठौर, पंचम कुशवाहा का हुआ सम्मान

नरसिंहपुर। देश के सबसे संघर्षशील एवं 44 वर्षों से पत्रकारों के हितों में सेवा संघर्ष करने वाले ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन (आइसना ) राष्ट्रीय स्तरीय पत्रकार संगठन के द्वारा विगत नो वर्षों से पत्रकार सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन सतत रूप से किया जा रहा है जिसमे वरिष्ठ पत्रकारों और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों का सम्मान किया गया ।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

22 फरवरी 2026 में मां नर्मदा के तट सीढी घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में भोपाल एवं जबलपुर से पधारे वरिष्ठ पत्रकारों एवं आईसना संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय जी. डेविड, प्रदेश महासचिव पंडित विनोद मिश्रा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमर नौरिया, प्रदेश संगठन महामंत्री प्रशांत वैश्य, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रहलाद कौरव, प्रांतीय उप सचिव कुणाल सिंह कार्यक्रम के जिला संयोजक केशव स्थापक कार्यक्रम प्रभारी और जिला अध्यक्ष राजेश लोधी संगठन को लेकर और पत्रकारिता क्षेत्र को लेकर अपने-अपने विचार रखें उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता बहुत कठिन दौर से गुजर रही है धरातल की पत्रकारिता वही है जो हर छोटे बड़े मुद्दे जनता से जुड़े मुद्दे उठाएं घोटालों को जनता के सामने लाना, अपनी कलम से उसे उजागर करना यही असली पत्रकारिता है पर आज ऐसे पत्रकारों को सबसे ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है जो घोटालों की परत खोल रहे है।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान


इस सफल कार्यक्रम के लिए सभी ने संगठन के सदस्यों की एकता एकजुटता की भी प्रशंसा की और कहा कि आइसना संगठन लगातार पत्रकारों के हितों में कार्य कर रहा है, संगठन के सदस्यों की एकजुटता से ऐसे आयोजन सतत रूप से होना संभव हुआ है.


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार नीलेश जाट ,सौरव राठौर और गाडरवारा के वरिष्ठ पत्रकार पंचम कुशवाहा जी का नगद राशि और स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मान किया गया ।

वहीं गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए करने के लिए संघर्ष करने वाले अनुराग भार्गव जी का भी सम्मान किया इस मौकों पर सिख समाज से भी कुछ वरिष्ठ शामिल हुए जिसमें जनरल सिंह और लखवीर सिंह द्वारा भी अपने विचार रखे ।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

श्री बुद्ध प्रकाश विश्वकर्मा जी को नशे के खिलाफ आवाज उठाने के लिए और सुरेश ठाकुर को समाज सेवा के लिए सम्मानित किया गया वही संगठन के सहयोग के लिए बरमान के युवा पत्रकार सुभाष और वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर मालवीय जी को सम्मानित किया गया ।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष विनय जी. डेविड द्वारा सभी पत्रकार बंधुओ को प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया, जिसमें संपादक गौरव रैकवार, धर्मपाल रजक, शिल्पी जैन , सचिन जोशी, सुश्री मालती गुर्जर, अरुण शर्मा, दीपक अग्रवाल, रंजीत तोमर, डाक्टर बृजेश रजक, अंकित नेमा आशीष दुबे, लीलाधर लोधी यश वर्मा, दीपक मुदगल सहित अनेक पत्रकारों को सम्मान पत्र प्रदत्त किए गए ।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

कार्यक्रम वरिष्ठ पत्रकार प्रदेश सह सचिव मंजीत सिंह छाबड़ा जी द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रम में सभी वरिष्ठ पत्रकारों के साथ समाज सेबी भी उपस्थित रहे, साथ ही उनका सम्मान-साल श्रीफल व सम्मान पत्र देकर किया गया।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान

नर्मदा घाट में हुए इस आयोजन में जबलपुर जिले से पत्रकार पुष्पेंद्र सिंह परिहार, पत्रकार राज गुलाटी, शैलेन्द्र शेलू सहित अन्य लोग उपस्थित हुए।


आइसना पत्रकार संगठन के 9वें सम्मान समारोह 2026 में वृद्धाश्रम एवं समाज सेवियों का सम्मान


मंच संचालन मंजीत छाबड़ा और आभार कार्यक्रम के संयोजक केशव स्थापक द्वारा किया गया ।

शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

RTI का उल्लंघन : न्यायिक और अर्ध न्यायिक निर्णयों के आलोक में सूचना के अधिकार के विधिक पहलू, अब IPC नहीं, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की मदद ले

 

 
RTI का उल्लंघन : न्यायिक और अर्ध न्यायिक निर्णयों के आलोक में सूचना के अधिकार के विधिक पहलू, अब IPC नहीं, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की मदद ले

सभी जिले एवं तहसीलों में ब्यूरो संवाददाताओं की आवश्यकता है हमसे  (https://timesofcrime.com/ ) जुड़ने के लिए संपर्क करें : 9893221036 

 RTI का उल्लंघन :

जब सूचना रोकी जाती है, तो कानून आवेदक के साथ खड़ा होता है। सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के आवेदक-पक्षीय न्यायिक निर्देशों के आलोक में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 किसी अधिकारी की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि नागरिक को सशक्त बनाने के लिए लागू किया गया कानून है।
इसके बावजूद आज भी लोक सूचना अधिकारी सूचना को रोकना, टालना या भ्रामक उत्तर देना अपना विशेषाधिकार समझ बैठे हैं।
परंतु न्यायपालिका का रुख इस विषय में लगातार और स्पष्ट रहा है—
जहाँ सूचना रोकी जाती है, वहाँ कानून आवेदक के साथ खड़ा होता है।

Supreme Court -

नागरिक का जानने का अधिकार सर्वोपरि है।
सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार यह दोहराया है कि RTI किसी विभागीय कृपा का विषय नहीं है।
🔹
State of U.P. v. Raj Narain (1975) मामले में
SC ने ऐतिहासिक रूप से कहा —
“लोकतंत्र में जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकार क्या कर रही है।”
यह निर्णय आज भी RTI कानून की रीढ़ माना जाता है और पूर्णतः नागरिक-पक्षीय है।
🔹
S.P. Gupta v. Union of India (1981) केस में
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि खुली शासन व्यवस्था (open government) लोकतंत्र का मूल तत्व है और
गोपनीयता अपवाद है,
नियम नहीं।
🔹
Manohar Lal Sharma v. Union of India मामले में RTI से जुड़े अवलोकन कर
SC ने कहा कि सूचना से इनकार तभी संभव है,
जब वह कानूनन अपवाद में स्पष्ट रूप से आती हो।
अन्यथा सूचना देना बाध्यकारी है।
➡️

सुप्रीम कोर्ट का सिद्धांत :

RTI में देरी या अस्वीकार।
✔
बिना उचित आधार के सूचना न देना नागरिक के मौलिक अधिकार का उल्लंघन : केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) का आवेदक को केंद्र में रख कर दिया गया निर्णय।
CIC के अधिकांश निर्णायक आदेश यह स्थापित करते हैं कि —
🔹
Bhagat Singh v. CIC & Ors. (CIC में उद्धृत, बाद में HC द्वारा अनुमोदित सिद्धांत)
“सूचना रोकने का तर्कसंगत आधार बताने का भार लोक सूचना अधिकारी/ लोक प्राधिकार पर है,
न कि सूचना माँगने वाले नागरिक पर।”
🔹
CIC के निरंतर निर्णय (2023–2025) -
“रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं” कहना तब तक स्वीकार्य नहीं,
जब तक रिकॉर्ड के नष्ट होने/अस्तित्वहीन होने का विधिवत प्रमाण न हो।
अधूरी या भ्रामक सूचना देना, सूचना न देने के समान है
🔹
CIC का स्थापित सिद्धांत
यदि मामला प्रथम व द्वितीय अपील तक पहुँचा—
• यह स्वयं में PIO की विफलता का प्रमाण है
और दंडात्मक कार्रवाई का आधार बनता है।
• CIC का झुकाव स्पष्ट रूप से आवेदक-पक्षीय है,
न कि प्रशासन-संरक्षक।
• High Court : RTI नागरिक का औज़ार है, अधिकारी की ढाल नहीं।
उच्च न्यायालयों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि RTI अधिनियम को कमजोर करने की कोई भी कोशिश अस्वीकार्य है।
🔹
Delhi High Court – J.P. Agrawal v. Union of India (2011) मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा —
देने योग्य उपलब्ध सूचना देने के लिए PIO व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी है।
यह तर्क स्वीकार्य नहीं कि “विभाग ने सूचना नहीं दी।”
यह निर्णय स्पष्ट रूप से RTI आवेदक के अधिकारों की रक्षा करता है।
🔹
Bombay High Court : मुंबई हाईकोर्ट ने माना कि
RTI अधिनियम का पालन न करना गंभीर कदाचरण
(serious misconduct) है
और नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है।
🔹
Rajasthan High Court के निर्णयों का स्थापित रुझान -
यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी लोक सूचना अधिकारी की गलती को ढंकने का प्रयास करता है,
तो वह भी समान रूप से दोषी माना जाएगा।

अब IPC नहीं, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की मदद ले :

आवेदक के अधिकार को आपराधिक कानून कानून के अंतर्गत संरक्षण ;
RTI उल्लंघन अब केवल जुर्माने का विषय नहीं रहा।

BNS लागू होने के बाद आवेदक का कानूनी संरक्षण और मजबूत हुआ है।
IPC 166 → BNS धारा 198 लागू होती है
लोक सेवक/लोक सूचना अधिकारी द्वारा जानबूझ कर कर्तव्य उल्लंघन कर
आवेदक को मानसिक/आर्थिक क्षति पहुँचाने पर।

IPC 166A → BNS धारा 199 लागू होती है
कानूनन आवश्यक कार्य (RTI सूचना देना) को नहीं करने पर।

IPC 175 → BNS धारा 221 लागू होगी
सूचना/दस्तावेज जानबूझ कर न देने पर।

IPC 188 → BNS धारा 223 लागू होती है प्रथम अपीलीय अधिकारी या केंद्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग
(FAA / CIC / SIC) के आदेशों की अवहेलना करने पर।

निष्कर्ष : अब तराजू एक तरफ़ा नहीं

सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC, High Court, Supreme Court) — तीनों का संयुक्त संदेश स्पष्ट है :

  1. RTI आवेदक याचक नहीं, अधिकार-धारक है।
  2. सूचना रोकना अब प्रशासनिक गलती नहीं,
  3. बल्कि संवैधानिक और आपराधिक उल्लंघन है।
* Legal Ambit का स्पष्ट मत है कि अब अपीलों में उलझाने की संस्कृति समाप्त होनी चाहिए और
जहाँ आवश्यक हो, आवेदकों को सीधी विधिक कार्यवाही करना चाहिए।
#Legal Ambit एप आरटीआई उपयोग कर्ताओं की निशुल्क कानूनी मार्गदर्शन/ सहायता करता है। आरटीआई के क्षेत्र में सक्रिय वकीलों के समूह द्वारा संचालित है यह एप। आरटीआई संबंधी मामलों में विधिक कार्यवाही के लिए आप इस ऐप से सलाह ले सकते हैं।

- भाई विनोद कुमार की पोस्ट